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बुधवार, 12 नवंबर 2008

हे ईश्वर...कहां हो...?

...ईश्वर तो यकीनन है...एक बार की बात है ईश्वर अपने लिए एकांत खोज रहा था...मगर अनगिनत संख्या में मानव जाती के लोग उसे एकांत या विश्राम लेने ही नही देते थे...नारद जी वहां पहुंचे...ईश्वर का गमगीन चेहरा देख,परेशानी का सबब पूछा...कारण जान हंसने लगे...ईश्वर हैरान नारद बजाय सहानुभूति जताने के हंसते है...नाराज हो गए...तो नारद ने उसे कहा,'भग्वान'आदमी बाहर ही आपको खोजता है...अपने भीतर वो कभी कुछ नही खोजता...आप उसी के भीतर क्यों नही छिप जाते...ईश्वर को बात पसंद आ गई...तब से आदमी के भीतर ही छिपा बैठा रहता है...और एकाध इक्का-दुक्का आदमी ही उसकी खोज में अपने भीतर उतरता है...ईश्वर भी खुश...आदमी भी खुश...

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