एक व्यक्ति मोहनदास करमचंद गाँधी,जिन्हें हम बापू कहते है,आजकल सरकार ने उनकी एक तस्वीर डाक टिकट के रूप में निकली है.जिसे हम जीभ से गीला करके लिफाफे पर रखकर ऊपर से जोर हाथ मरकर चिपकाते है.उसके बाद पोस्ट ऑफिस का कर्मचारी अपनी काली स्टांप मरकर राष्ट्रपिता का चेहरा काला कर देता है.फ़िर पत्र पाने वाला व्यक्ति लिफाफ से पत्र निकाल कर गाँधी जी को कूडेदान में डाल देता है। लेकिन मै ये कहना चाहता हूं की देश की सरकार को यही सब करवाना है,तो २.अक्तूबर क्यों मनाते है? राजघाट पर क्यों जाते है?मगर हमारा भारत देश महान है.शायद इसलिए यहां सम्मान के साथ अपमान भी जायज है।
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9 वर्ष पहले
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